आस्था का प्रतीक हसपुरा का प्राचीन तालाब

चैत माह नजदीक आते ही हसपुरा बाजार का प्रसिद्ध व प्राचीन तालाब की चर्चा होने लगी है। यह तालाब आज किसी परिचय का मोहताज नही है।यह तालाब पूरे प्रखंड में प्रसिद्ध है।इस धरोहर को सहेज कर रखने के लिए ग्रामीण हमेशा से सक्रिय रहे हैं। यहां कार्तिक माह में आस पास के हजारों श्रद्धालु छठव्रत करने पहुंचते हैं और डूबते तथा उगते सूर्य को अर्ध देते हैं।इस तालाब का महत्व इतना बढ़ गया है कि हसपुरा बाजार के साथ दूसरे जगहों से श्रद्धालू छठ ब्रत करने व मन्नते मांगने यहां पहुंचते हैं।तालाब की स्थिति जानने शुक्रवार को जागरण टीम स्थल पर पहुंची।अभी पानी है।पशु आकर पानी पीते हैं। लेकिन चैत के मौसम में पानी न के बराबर राह जाती है।ग्रामीण अनिल कुमार,दिलीप प्रसाद,दीनानाथ कुमार,अजय प्रसाद बताते हैं कि यदि चैत माह में तालाब में पानी रहे तो ग्रामीण चैती छठ भी कर सकते है।तालाब बाजार से लगभग एक किलोमीटर पश्चिम दिशा में छठी आहरा के नाम से है।तालाब के बगल से आहरा निकलती है इसलिए इसका नाम छठी आहरा तालाब है।जनप्रतिनिधियों द्वारा उड़ाही व तालाब में घाट भी निर्माण कराया गया है।हलांकि पूरा में नही है। छठी अहरा तालाब का पौराणिक कथा है। कहा जाता है कि सौ वर्ष पूर्व छठी नाम की एक महिला कई बिमारी से ग्रसित थी।वह इसी तालाब में प्रति दिन स्नान करती थी। जब छठ व्रत आया तो उपवास रहकर इसी तालाब में छठ व्रत किया। इसके बाद महिला की सभी बिमारी ठीक हो गया।तब से छठी अहरा तालाब छठव्रतियों के आस्था और विश्वास का केन्द्र बन गया।