जयश्रीराम के जयघोष से माहौल भक्तिमय
हसपुरा बाजार के श्री भास्कर नगर के बुढ़वा महादेव मंदिर के प्रांगण में नव दिवसीय रामलीला कार्यक्रम चल रहा है।कार्यक्रम को लेकर क्षेत्र में उमंग व उत्साह कायम है।डॉ संजय कुमार,रामबाबू गुप्ता,डॉ जेके शर्मा, सुरेश आर्य, बैजू कुमार,सुनील कुमार,पिंटू चौधरी ने आयोजन के लिए कमिटी को धन्यवाद दिया।रामलीला के छठे दिन बुधवार की रात प्रयागराज के कलाकारों द्वारा सूर्पणखा की नाक कटने,राम केवट संवाद, मारीच वध व सीता हरण का मंचन किया गया। रामलीला में दिखाया गया कि वनवास के दौरान पंचवटी में सूर्पणखा राम व लक्ष्मण को देखकर मोहित हो जाती है। वह इन्हें रिझाकर शादी का प्रस्ताव देती है। राम और लक्ष्मण के इनकार करने पर सूर्पणखा सीता पर हमला कर देती है। इस पर भगवान राम की आज्ञा पाकर लक्ष्मण सूर्पणखा की नाक काट देते हैं। सूर्पणखा अपनी कटी नाक लेकर भाई खर और दूषण के पास पहुंचती है। खर जिसमें एक हजार हाथियों का बल था। वह भाई दूषण और सेना के साथ राम-लक्ष्मण से युद्ध करने निकल पड़ता है। वहां इनका आपस में भयंकर युद्ध होता है। अंत में दोनों भाइयों की मौत हो जाती है। इसके बाद लंकापति रावण को संदेशा पहुंचता है।वहीं राम-केवट संवाद में सुंदर व मनोहारी प्रस्तुति देख दर्शक भाव विभोर हो उठे।
जयश्रीराम के जयघोष से पंडाल का माहौल भक्तिमय हो उठा।कलाकारों ने दिखाया कि भगवान श्रीराम सरयू नदी किनारे खड़े होकर केवट से नदी पार कराने के लिए आग्रह करने लगे। केवट प्रभु राम के पास आता है व कहता है कि आप कौन हैं, कहां से व कहां जा रहे हैं, अपना परिचय दें। श्रीराम केवट को अपना परिचय देते हैं तो केवट वहां से भाग कर दूर खड़ा होता है, कहता है कि आप वही राम हैं जिनके छूते ही पत्थर की शिला नारी बन गई। मेरी नाव काठ की है, यह तो छूमंतर हो जाएगी। मैं अपने परिवार का पालन पोषण कैसे करूंगा। मैं आपको नदी पार नहीं करा सकता। इस पर राम ने कहा कि केवट ऐसा कोई उपाय है। जिससे तुम हमें नदी पार करा दो। केवट ने कहा कि हां पहले अपने चरण धुलवाओ, चरण धोने के बाद केवट ने नदी पार कराई। नदी पार करने के बाद प्रभु राम, सीता की अंगूठी केवट को देने लगे तो केवट बोला कि हे प्रभु एक मजदूर दूसरे मजदूर को मजदूरी नहीं देता। भगवान केवट की भावनाओं का सम्मान किए। मल्लाह मल्लाहों से मल्लाही नहीं लेते।